लता मंगेशकर को दिया गया था धीमा जहर’ हुआ बड़ा खुलासा

साठ के दशक में, प्रतिष्ठित गायिका लता मंगेशकर ने लगभग अपने तीन महीने बिस्तर पर बिताये। वयोवृद्ध हिंदी लेखिका पद्मा सचदेव ने अपनी पुस्तक ‘ऐसा कहां से लाऊं’ में लता मंगेशकर के जीवन से कुछ अंश साझा किए हैं। एक अध्याय में, उसने खुलासा किया कि गायिका को 1962 में धीमा जहर दिया गया था।

पद्मा सचदेव ने लिखा है कि गायिका ने उन्हें बताया कि जब वह 33 साल की थीं, तो एक सुबह उनके पेट में तेज दर्द हुआ और उन्हें दो-तीन बार उल्टी हुई। लता मंगेशकर हिलने-डुलने की भी स्थिति नहीं थी और उन्हें शरीर में बहुत दर्द हुआ।

लेखक ने आगे कहा कि लता मंगेशकर धीमे जहर के कारण बेहद कमजोर हो गईं। वह तीन महीने से बेड रेस्ट पर थी और गा भी नहीं सकती थी। वह दर्द में थी और ठीक से खा भी नहीं पा रही थी। उन्हें खाना पीना भी कुछ खास रास नहीं आ रहा था, वह उस समय ठंडे सूप पर जीवित रहीं।

हालांकि, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है कि लता मंगेशकर को धीमा जहर किसने दिया था। बताया जाता है कि घटना के बाद उसका रसोइया बिना वेतन लिए ही घर से निकल गया। उन्होंने पहले भी कुछ बॉलीवुड हस्तियों के लिए काम किया था।

इसको लेकर जब लता मंगेशकर जी से पूछा गया कि आपको किस पर शक है तो उन्होंने बताया कि उन्हें पता चल गया था कि किसने उन्हें ये ज़हर दिया है। मगर पर्याप्त सबूत ना होने की वजह से वे उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं ले सके।

ठीक होने के बाद लता जी का पहला गाना ‘कहीं दीप जले कहीं दिल’ हेमंत कुमार ने कंपोज किया था। लता जी बताती हैं, “हेमंत दा घर आए और मेरी मां की इजाजत लेकर मुझे रिकॉर्डिंग के लिए ले गए। बता दे की लता जी के उस गाने ने फ्लिम फेयर अवार्ड जीता था।


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