“मेरे गाने से ही कश्मीर शब्द को ही हटा दिया गया था” मशहूर गीतकार संतोष आनंद ने किया बड़ा खुलासा

 

हाई में रिलीज हुई फिल्म कश्मीर फाइल्स ने देश में एक क्रांति ला दी है। इस फ़िल्म में मनुष्यता के इतिहास में दर्ज भयानक नरसंहार की सच्चाई को दिखाया गया है। बता दें कि सरस्वती सभ्यता के वंशज माने जाने वाले कश्मीर पंडितों ने ऐसी भयानक त्रासदी सही है। उन्हें उनकी खुद की पैतृक भूमि भारत में ही 7 बार अपना घर छोड़ना पड़ा । उन्हें उनके घर से प्रताड़ित करके बाहर कर दिया गया और ऐसा ना करने पर उनकी जान भी ले ली गई।

कश्मीरी पंडितों का दर्द बयान करती है

कश्मीर में रहने वाले पंडितों की इसी पीड़ा को दर्शाती है द कश्मीर फाइल्स । इस फिल्म को देश-विदेश हर जगह काफि सपोर्ट प्राप्त हुआ है और या फिल्म चीख कर के कश्मीरी पंडितों के साथ हुई त्रासदी एवं कश्मीरी पंडितों का दर्द बयान करती है। बता दें कि इस फिल्म को लेकर के दुनिया भर की प्रतिक्रिया देखने में आ रही है । इसी बीच मशहूर कवि संतोष आनंद ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की है।

संतोष आनंद ने किया बड़ा खुलासा

बता दे कि संतोष आनंद ने कश्मीर फाइल्स को अच्छी फिल्म बताते हुए काहे की सच्चाई को कभी भी छिपाया या फिर दबाया नहीं जा सकता है। बता दे की संतोष आनंद ने अपने साथ घटित हुए एक किस्से के बारे में भी बात की है। उन्होंने बताया है कि सन 1990 में रिलीज हुई फिल्म तहलका के लिए उन्होंने गीत लिखा था। गीत के बोल इस तरह थे कि ,”दिल दीवाने का डोला दिलदार के लिए।” यह काफी हिट भी हुआ था । संतोष आनंद बताते हैं कि उन्होंने इस गीत में ” दिल दीवाने का डोला कश्मीर के लिए” लिखा था। लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे अनुमति नहीं दी थी। जिसके बाद इस में से कश्मीर शब्द को हटा दिया गया था और यहां पर दिलदार शब्द का उपयोग किया गया था ।

कश्मीर शब्द को ही हटवा दिया गया

संतोष आनंद ने कहा है कि मेरे गाने से तो कश्मीर शब्द को ही हटवा दिया गया था। इस बात के लिए उन्होंने काफी नाराजगी जताई थी लेकिन उनकी यह नाराजगी नाकाम और बेमतलब रह गई थी । बता दे कि संतोष आनंद के इस बड़े खुलासे पर कश्मीर फाइल्स के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने ट्वीट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह कहा है कि ,” गूगल करें कि उस वक्त सरकार किसकी थी?” दोस्तों आपको बता दें कि कवि संतोष आनंद फिल्मों के लिए भी गीत लिखते हैं। यह फिल्मों के लिए लगभग 109 गाने लिख चुके हैं। इन्होंने फिल्म पूरब और पश्चिम , शोर रोटी कपड़ा और मकान एवं क्रांति जैसी बड़ी फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे हैं।

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