यूक्रेन से भारत लौटी छात्रा ने बयां किया मौत का वो खौफनाक मंज़र, कहां इधर उधर पड़ी थी लाशें…

Riya Told The Scary Scene Of Ukraine :

यूक्रेन में चल रही तबाही की बेहद सी तसवीरें सोशल मीडिया के ज़रिये वायरल हुई है जिन्हे देख कर लोगो की रूह कांप उठी है। इसी तबाही के मंज़र के बीच भारतीय छात्रों को वहां से निकाला गया। जिस बिच एक भारतीय छात्र के स्वदेश लौट आने के बाद उससे बात चीत की गयी।

भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबित उन्होंने यूक्रेन से लौटी एक छात्र से वहां के हालात का जायजा लेने के लिए उससे बात चीत की। बता दे की छात्रा का नाम रिया अदिति लदेर है जो कि छत्तीसगढ़ की रहने वाली है। अपनी आप बीती बताते हुए रिया ने कहा कि उन पलों को याद करके मैं अभी सहम सी जाती हूँ। वो कुछ ऐसा था जिसे देख कोई भी खौफ से भर जाता।

रिया ने बताया कि वह यूक्रेन के खारकिव में मेडिकल में 6th ईयर की स्टूडेंट्स थी, 20 फरवरी तक सब कुछ नार्मल चल रहा था कि तभी उन्हें अचानक बताया गया कि अब ऑनलाइन क्लास शुरू की जाएंगी किसी को कैंपस में आने की ज़रूरत नहीं है। रिया ने बताया कि उस समय किसी को अंदाज़ा नहीं था युद्ध होने वाला है।

इसी बीच 24 फरवरी को शाम 5 बजे के लगभग अचानक उन्होंने बोम्ब और फायरिंग की आवाजें सुनी। जिसको लेकर उन्हें बताया गया कि यूक्रेनी सेना युद्ध अभ्यास कर रही है। इसके बाद हर गुज़रते पल के साथ ही लगातार बमबारी होने लगी। तभी सभी छात्रों के पास एंबेसी से मैसेज आया कि भारतीय स्टूडेंट्स मेट्रो स्टेशन में चले जाएं।

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अचानक चारो तरफ अफरा तफरी का माहोल हो गया जिस बिच वे सब मेट्रो स्टेशन में पहुंचे मेट्रो जमीन के नीचे थी लिहाजा, वो जगह सुरक्षा के लिहाज़ से सही थी। युद्ध के हालात में उन्हें 28 फरवरी तक मेट्रो पर ज़मीन के निचे ही रहना पड़ा जब तक की वे खारकीव ना छोड़ दे।

5 डिग्री तापमान में सोना पड़ता था ज़मीं पर :

रिया ने आगे बताया की उन्हें 26 फरवरी को उनके रूम के पास स्तिथ बंकर में भेज दिया गया। जहां उन्हें अपने दिन रात बिताने पड़े। उन्हें केवल सुबह फ्रेश होने के लिए तथा खाना बना कर लाने के लिए जाने दिया जाता था। एक एक करके सभी लोग जाया करते थे और जल्द से जल्द उन्हें वापस आना होता था।

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कम समय के कारण वे केवल जल्दी बनने वाले कहना जैसे बटर ब्रेड या मग्गी ही बना कर ला सकते थे। और उसी से उन्हें होना पूरा दिन और रात निकलना पड़ता था। रात को कपा देने वाली ठंड पड़ती थी जिसके बिच उन्हें ज़मीन पर ही सोना पड़ता था।

धमाकों की आवाज़ से हिल जाता था बंकर :

रिया ने बताया की हर 5 मिनट में उन्हें बड़े धमाकों की आवाजें आती थी और गोलियों की आवाज़ तो रूकती ही नहीं थी। जब भी आस पास कोई धमाका होता तो पूरा बंनकर हिल जाता था। जिसके कारण सभी लोग हर वक़्त डरे और सहमे से रहते थे।

रोड पर पड़ी लाशों को देख दहल उठे दिल :

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28 फरवरी तक कैसे जैसे बंकर में दिन निकलने के बाद उनके पास सूचना आई कि उन्हें खारकीव स्टेशन पहुंचना है। जिसके बाद सभी लोग टैक्सी से खारकीव स्टेशन पहुंचे। रिया ने बताया कि जब वे टैक्सी से स्टेशन जा रहे थे उसके बिच का सफर दिल दहला देने वाला था।

रोड पर जगह जगह लाशें पड़ी थीं और चारो ओर सन्नाटा छाया हुआ था। लगातार बम्ब बारी के चलते पूरा शहर तहस नहस हो गया था। कुछ जगह तो खून से लाल हो रखी थी। ऊँची ऊँची बिल्डिंगें धराशाही होइ पड़ी थी और जगह-जगह यूक्रेनियन सैनिक हथियारों से लैस नजर आ रहे थे।

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स्टेशन पर थे अनगिनत लोग :

जैसे तैसे करके सभी लोग स्टेशन तक पहुंचे और पहुंचते ही देखते है की वहा लोगो की भीड़ लगी हुई है क्युकी यूक्रेनियन भी खारकिव छोड़कर जा रहे थे। भीड़ जब काबू से बाहर होने लगी तो वहां मौजूद यूक्रेनियन सैनिकों ने धमाका कर छात्रों के साथ मारपीट भी की।

रिया ने बताया कि इस बीच उनकी 3 ट्रेन मिस हो चुकी थी फिर कैसे जैसे कर के उन्होंने लविव स्टेशन के लिए ट्रेन पकड़ी। खारकिव से 22 घंटे के सफर के बाद सब लविव स्टेशन पहुंचे। यहां से टैक्सी में चोप बॉर्डर गए और वहां 12 घंटे लाइन में लग कर टिकट व इमिग्रेशन लिया।

फिर बस से वे सब जूहोनी हंगरी बॉर्डर तक पहुंचे जहां उन्हें इंडियन एंबेसी द्वारा रिसीव किया गया जहां से फिर सभी छात्रों को हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट लेकर गए। जहां उन्हें बुडापेस्ट होटल में ठहराया था। होटल पहुंचने के बाद सभी ने राहत की सांस ली। जहां से फ्लाइट की टिकट कर के उन्हें भारत भेजा गया।


 

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