बेटी ने निभाया बेटे का फ़र्ज़, पुरे ढंग से किया अपने पिता का अंतिम संस्कार, लोग देख के बोले…

Daughter Performed Last Rites Of Her Father :

हम सब एक समाज में रहते है जिसके कुछ नियम और कायदे लोगो द्वारा निर्धारित किये गए है। भारत एक पुरुष प्रधान देश होने के कारण अक्सर यहाँ के लोगो द्वारा लड़कियों को कम आंका जाता है। उन्हें बहुत सी चीजों से दूर रखा जाता है जो हमारे देश के पिछड़ने का प्रमुख कारणों में एक रहा है।

बीते कुछ साल में बेटी द्वारा अपने पिता का अंतिम संस्कार करने की कुछ खबरें सामने आई थी पर वे ख़बरे मुख्यते शहरो से थी। मगर हाल ही में एक खबर मध्यप्रदेश के मुरैना से आई है की अपने पिता के गुज़र जाने के बाद उनकी बेटी ने पुरे तौर तरीको से अपने पिता का अंतिम संस्कार किया।

मुरैना मध्य प्रदेश का एक ग्रामीण इलाका है जहाँ के लोग परम्पराओं को निभाने में अधिक विश्वास करते हैं या यूँ कहें कि काफी हद तक रूढ़िवादी होते हैं। यहाँ के लोग आज भी बेटो को ही बेटियों से श्रेष्ठ मानते है और लड़को को ही प्रधानता दी जाती है। ऐसी में एक बेटी ने पिता का अंतिम संस्कार कर एक उदाहरण पेश किया है।

मुरैना शहर के सांवरिया बोहरे वाली गली गणेशपुरा में रहने वाले कृष्ण कुमार उपाध्याय लंबे समय से बीमार चल रहे थे लेकिन कुछ दिनों पहले उन को लकवा मार गया जिससे उनकी तबियत और ज्यादा नासाज़ हो गयी। तबियत लगातार बिगड़ने के कारण गुरुवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

आपको बता दे कि कृष्ण कुमार के कोई संतान नहीं था जिसके कारण उन्होंने एक लड़की को गोद लिया था। उस लड़की का नाम कोमल था, जो के बेहद होनहार भी है न पिता के बीमार होने पर बेटी ने उनकी खूब देखभाल की परंतु भगवान के आगे किसी की ना चली।

अपने पिता की मृत्यु के बाद बेटी ने बेटे का फर्ज अदा करते हुए अपने पिता की अर्थी के साथ मटकी लेकर गई तथा मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दरमियान 500-600 लोग मौजूद थे जिन्होंने इस पूरे दृश्य को देखा। वहां उपस्थित कुछ लोगो ने कोमल की इस काम के लिए सहरानायें की कुछ लोगो को ये थी ना लगा।

Pic Credit – MP Breaking news

मुरैना में नहीं मनाया जाता बेटी होने पर उत्सव :

मध्यप्रदेश के मुरैना उन इलाको में से एक है जहां आज भी बेटी का जन्म होने पर लोगो के द्वारा खुशियां नहीं मनाई जाती। वे आज भी बेटो के होने पर ही उतसव का आयोजन करते है तथा किसी भी शुभ कार्य में भी वह पुरुषों को ही प्रधानता दी जाती है।

इसके पीछे लोगो का यही मानना है की लड़के ही वंश को आगे बढ़ाते है इसीलिए वहा के लोग लड़कों को ज्यादा महत्वता देते है। पर कोमल द्वारा किया गया ये कार्य शायद उनकी सोच को थोड़ी सी सही दिशा प्रदान करे और वे इस भेद भाव को बंद कर दे।


 

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