45 पुरुषों के बीच अकेली महिला कुली हैं संध्या, सम्मान से कमाती हैं, बच्चों को बनाना चाहती हैं अफसर

हर महिला की जिंदगी संघर्षमय होती है लेकिन यदि किसी महिला की जिम्मेदारी पूरी तरह से उसके सिर पर आ जाए और उसके पति की मृत्यु हो जाए तथा तीन बच्चों का पालन-पोषण उसे ही करना हो तो सोचिए उसकी जिंदगी कैसी होगी। हम बात कर रहे हैं संध्या की जो एक 31 वर्षीय महिला है और वह कुली का काम करती है।

45 आदमियों के बीच अकेली महिला कुली हैं संध्या, इज्जत से कमाती हैं, बच्चों  को बनाना चाहती हैं अफसर

उनकी इस कड़ी मेहनत को देखकर लोग अवाक रह जाते हैं , लेकिन उनका कहना है कि मेरे हौसले अभी तक जीवित हैं और मैं अपने इज्जत से कमाए हुए पैसे से अपने बच्चों को पढ़ा लिखा कर फौज में भर्ती कराना चाहती हूं।

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उनका पति उनसे छिन चुका है और अपने परिवार के पालन पोषण के लिए वह यह काम करती है। वह कुली नंबर 36 है। मध्य प्रदेश के कटनी रेलवे स्टेशन में वह यह काम करती है। उन्होंने अपने नाम का लाइसेंस भी बना रखा है।

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आपको बता दें कि इस महिला का नाम संध्या मारावी है। यह महिला 2017 से यह काम करती हुई आ रही है। उनके इस काम और कड़ी मेहनत को देखकर लोग उनकी तारीफ किए बिना नहीं रहते हैं।

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संध्या 30 वर्ष की उम्र तक एक गृहिणी थी लेकिन बीमारी की वजह से 22 अक्टूबर 2016 को उनके पति की मृत्यु हो गई। उनके पति भोलाराम बीमार होने के बावजूद मजदूरी करते थे और अपने परिवार का घर खर्च चलाते थे लेकिन उनकी मृत्यु हो जाने के बाद पूरी जिम्मेदारी संध्या के सिर पर आ गई।

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नौकरी की बहुत आवश्यकता होने पर जब उन्हें नौकरी नहीं मिली तब उन्होंने इस काम को चुना और कुली का काम करने लगी। 45 पुरुषों के बीच संध्या यह काम करती है।

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इनका घर जबलपुर में है जिसके कारण यह 45-45 किलोमीटर आना जाना यानी कि कुंडम से प्रतिदिन 90 किमी ट्रैवल करती हैं। उनके बच्चे शाहिल की उम्र 8 वर्ष, हर्षित की उम्र 6 साल व बेटी पायल 4 वर्ष की है। संध्या चाहती है कि उनके बच्चे पढ़ लिखकर फौज में भर्ती हो और स्वाभिमान की जिंदगी जिएं।

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