सब्जी बेचने वाले ने कूड़ेदान से उठाया इस बच्ची को,25 साल बाद बेटी ऐसे दे रही है अपने पिता का साथ

जीवन देने का हक ईश्वर को पास है और जीवन लेने का हक भी ईश्वर के ही पास है। ऐसा कई जगह होता है कि जब देखा जाता है लोगों ने किसी को मरने के लिए छोड़ दिया है। लेकिन वह व्यक्ति फिर से जी उठता है। आज के दौर में सभी को यह लगता है कि इंसानियत खत्म हो चुकी है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है।

आज भी कुछ ऐसे लोग हैं जो मानवता के लिए एक अलग ही जज्बा रखते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं ।जिसने एक मासूम से बच्चे को गोद लिया ।और उसका पालन पोषण बिना किसी स्वार्थ के किया।

गरीब किसान ने कूड़े से उठा कर गले लगाया, 25 साल बाद ऐसे चुकाया एहसान -

आपको बता दें यह घटना आसन की है असम में रहने वाले सोबरन सब्जी बेचने का काम करते थे। और इसी से अपने घर का पालन पोषण करते थे । वह दिनभर सब्जी में बेचने वाली गाड़ी चलाते थे। एक दिन जिस वक्त वह सब्जी वाली गाड़ी लेकर के सड़क से गुजर रहे थे, तब उन्होंने झाड़ियों में से किसी बच्चे की रोने की आवाज सुनाई दी। सोबरन झाड़ियो में जाकर के बच्चे के रोने की आवाज तक पहुंच गए। उन्होंने देखा की झाड़ी में एक बच्ची कूड़े के ढेर में पड़ी हुई थी ।और जोर जोर से रो रही थी।

बता दें कि बच्ची को स्थिति में देख करके सोबरन ने उस बच्ची को कूड़े के ढेर से गोद में उठा लिया बता दें उस वक्त सोबरन की आयु केवल 30 वर्ष थी। जब उन्होंने इस बच्चे को गोद में लिया था। सोबरन अविवाहित थे और इस बच्ची को गोद में लेने के बाद उन्होंने यह फैसला कर लिया कि वह कभी भी आगे शादी नहीं करेंगे ।

इसके बाद सोबरन ने अपना पूरा जीवन इस बच्चे की परवरिश में लगा दिया। उन्होंने इस बच्ची का नाम ज्योति रखा। इस बच्ची का बहुत अच्छा पालन पोषण किया। सोबरन इस लड़की की शिक्षा में भी कोई कमी नहीं होने दी।

सोबरन ने ज्योति को अच्छी शिक्षा दिया और ज्योति ने भी अपने पिता को कभी भी निराश नहीं होने दिया। बता दे कि सोबरन ने अपनी बेटी ज्योति को साल 2013 में कंप्यूटर साइंस की डिग्री हासिल करवाई। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्योति ने उस साल की है असम लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण की। बता दें कि यह परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ज्योति को सहायक आयुक्त के रूप में पहली नियुक्ति प्राप्त हुई है। ज्योति अपने साथ-साथ अपने पिता का भी मान बढ़ा रहीं हैं।

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