बेटी ने अकेले ही दफनाया शव, लाश उठाने नही आया एक भी व्यक्ति, श्राद्ध भोज खाने आए 150 लोग

दम तोड़ते हुए सिस्टम की खबरें तो आए दिन हम सभी के सामने आती रहती है। लेकिन हाल ही में बिहार के अररिया में इंसानियत का भी जनाजा निकलते हुए देखा गया। आपको बता दें कि यहां पर महामारी के कारण एक महिला की जान चली गई । लेकिन इस महिला के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने के लिए गांव का एक भी व्यक्ति उसके दर पर नहीं आया।

बता दें कि इस महिला की अकेली लड़की ने पीपीई किट पहनकर के अपनी मां की शव को दफनाया। लेकिन सबसे हैरानी वाली बात यह है कि जो लोग उड़ी महिला के शव को दफनाने तक नही आते थे। वही लोग उस महिला के श्राद्ध भोज करने के लिए 150 से भी अधिक संख्या में आ गए थे। तब लोगों को इस बात का जरा सा भी ध्यान नहीं था कि जिस महिला का श्राद्ध भोज कर रहे हैं उसकी मौत महामारी में हुई। लेकिन जब इस महिला के शव को दफनाना था तब सभी को इस बात का डर था की महिला की मौत का कारण महामारी है।

coronavirus in bihar if the four shoulders were not found then the daughter  buried the body of the mother father mother died before corona asj | नहीं  मिले चार कंधे, तो बेटी

आपको बता दे कि इस महिला की अकेली लड़की की अपनी मां को दफनाते हुए कई सारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वाइरल हुए थे। इन्ही का एक वीडियो भी बहुत वायरल हुआ था जिसमें उसकी छोटी बहन रोते हुए दिखाई दे रही है। अफसोस की बात यह है कि ना ही गांव का और ना ही सिस्टम का कोई भी व्यक्ति इस परिवार का दुख बांटने के लिए वहां पहुंचा।

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इन दोनों बेटियों ने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। इन्होंने श्राद्ध भोज भी कर्ज ले करके किया था। और अब इस कर्ज को चुकाने के लिए इधर उधर भटक रही है। क्योंकि उन्होंने जिन लोगों से कर्ज लिया था वह अब अपना पैसा वापस मांग रहे हैं।

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बता दें कि यह घटना बिशनपुर पंचायत की है जहां पर मधुलता के रहने वाले वीरेन मेहता के घर की है। वीरेन के परिवार में अचानक ही महामारी का प्रकोप टूट पड़ा। वीरेन पेशे से एक डॉक्टर थे और गांव वालों के इलाज करते हुए वह भी इस महामारी की चपेट में आ गए। यह संक्रमण उनके द्वारा उनके पत्नी में भी फैल गया। और देखते ही देखते हैं वीरेंद्र और उनके चार दिन बाद उनकी पत्नी इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ कर के चले गए।

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माता पिता के बाद यह दोनों बेटियां बिल्कुल अकेले रह गए जहां यह बच्चियां माँ का शव दफनाने के लिए संघर्ष करती रही है। वही गांव के पंचायत के मुखिया सरोज कुमार मेहता का कहना है कि, वो खुद भी महामारी से संक्रमित हैं । और पिछले 15 दिनों में गांव के चिकित्सकों के साथ-साथ अन्य चार लोगों के भी महामारी से मौत हो चुकी है ।

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दूसरी और गांव वालों का कहना है कि परिवार में माता पिता की मौत के बाद बेटियों को हिम्मत बंधाने के लिए लोग पहुंचे थे। उनका कहना है कि अगर लोग भोज पर आए होते तो 800से 900 लोग पहुंचे होते। इनका कहना हैं कि बच्चियों से सहानुभूति होने के कारण ही डेढ़ सौ लोग हिम्मत बंधवाने के लिए श्राद्ध में पहुंचे थे।

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