बिहार की बेटी ज्योति ने जिस पिता के लिए चलाई थी 1200 किलोमीटर साइकल, उसी पिता ने कहा दुनिया को अलविदा

पिछले साल महामारी के कारण पूरे देश में राष्ट्रीय लोक डाउन लगा था। ऐसे में कई जगह के लोगों ने पैदल अपने घर वापसी शुरू की थी । कई लोग बहुत बुरी स्थिति में अपने घर से एवं अपने घर के लिए चले थे। इनमें से कुछ लोग पैदल कुछ लोग, कुछ लोग ट्रक ,बस एवं कुछ लोग साइकिल से भी अपने अपने घर लौटे थे।

ऐसे में बिहार की रहने वाली एक बेटी ज्योति ने एक अजूबा कर दिखाया था। जिसे देश आज तक नहीं भूला है। आपको बता दें कि पिछले साल लगे लॉकडाउन में बिहार की बेटी ज्योति ने अपने पिता को गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक साइकिल में बैठा कर के सफर किया था । इस लड़की ने 1200 किलोमीटर तक की यात्रा तय की थी।

जिस पिता के लिए बिहार की बेटी ज्योति ने चलाई थी 1200 किमी साइकल, उसने दुनिया  को कहा अलविदा - MP Breaking News

बता दें कि ज्योति की उम्र केवल 15 वर्ष है और उन्होंने अपने घायल पिता को ग्राम से लेकर दरभंगा तक साइकिल में पीछे बिठाकर की साइकिल चलाई थी। लेकिन इस साल एक बार फिर किस्मत ने जोती के साथ एक नाइंसाफी कर दी है। इस 15 साल की बच्ची ने अपने पिता को हमेशा के लिए खो दिया है। कार्डिक अरेस्ट के कारण ज्योति ने हमेशा के लिए अपने पिता को खो दिया। इनके पिता का निधन हो गया।

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बता दें की पिछले वर्ष ज्योति काफी चर्चा में आई थी। ज्योति के पिता गुरुग्राम में ई रिक्शा चालक थे। मार्च में पिता मोहन पासवान को रिक्शा चलाते वक्त चोट लग गई थी। और वह इस दुर्घटना में काफी गंभीरता से चोटिल हो गए थे।इस दौरान पिछले साल फैली महामारी के कारण देश में लॉकडाउन लगा दिया गया था। और सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद कर दिए गए थे।

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ऐसे में ज्योति ने एक अनोखा कारनामा करके दिखा दिया था जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। ज्योति ने 7 दिन तक अपने पिता को साइकिल के पीछे बैठा करके साइकिल चलाई थी। इन 7 दिन में से 2 दिन उनके पास खाने को भी कुछ नहीं रहा था। यह संघर्ष करते हुए ज्योति गुरुग्राम से दरभंगा पहुंची थी।

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ज्योति के इस बहादुरी के कारण ही उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भी प्राप्त हुआ था। ज्योति देश के गरीबों के दर्द एवं कठिनाइयों का एक चेहरा बनकर उभरी थीं। जिन्हें लॉकडाउन एवं गरीबी की समस्या के वजह से ऐसी विषम परिस्थितियों से जूझना पड़ा। एवं घर वापसी करनी पड़ी थी।

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