एक ऐसी महामारी जिसमें लोग नाचते नाचते मर गए

ज्यादातर लोगों को नाचना बहुत अच्छा लगता है। जो लोग स्टेज पर नहीं जाते हैं उन्हें भी भी कहीं ना कहीं डांस करना पसंद आता है। कभी व्यक्ति खुशी से नाश्ता है तो कभी जबरदस्ती नाचने लगता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसी कल्पना की है कि जब नाचते-नाचते इंसान का सामना उसकी खुद की मौत से हो जाए । क्या नाचते-नाचते कोई मर भी सकता है यह आपने सोचा है ।

डांसिंग डेथ: एक महामारी, जिसमें लोग नाचते-नाचते मर गए!

आज हम आपको एक ऐसे ही समय के बारे में बताने जा रहे हैं। जब नाचना लोगों के लिए अभिशाप बन चुका था। और इसने केवल एक दो इंसान ने बल्कि एक समुदाय को ही खत्म कर दिया था। या घटना 16 वी शताब्दी की है। जब नाच ने मौत का रूप ले लिया था। हर गली हर चौराहे पर लोग नाचते हुए नजर आते थे। और फिर उसी गली चौराहे पर लोगों की लाशें दिखाई देती थी।

फ्राउ ट्रॉफी ने शुरू किया था नाचना

डांसिंग डेथ: ऐसी महामारी जिसमें लोग नाचते थे और मर जाते थे.

बता दे कि 16वी शताब्दी के दौरान यूरोप के स्ट्रासबर्ग में रहने वाली वाली महिला एक दिन अचानक अपने घर से बाहर नाचते हुए निकली उसे नाचता देख आसपास के लोगों को लगा कि शायद उसके पास कोई खुशी का समाचार है। जिससे वह बहुत खुश है और खुशी में नाच रही है लोगों ने उससे पूछा लेकिन औरत का नाचना नहीं रुका। नाचना नहीं रोक सके तो लोगों को लगा कि शायद वह नशे में है इसलिए वह नाचे जा रही है या फिर पागल हो गई है।

डांसिंग डेथ: एक महामारी, जिसमें लोग नाचते-नाचते मर गए!

यहीं से डांसिंग प्ले की शुरुआत हुई थी बता दें कि इस विषय और घटना के बारे में लोगों को पुख्ता जानकारी नहीं पता है इसके तारीख के विषय में भी लोगों को नहीं पता है कि डांसिंग प्ले के शुरुआत कब हुई थी। लेकिन अंदाजा लगाया जाता है कि यह घटना 1518 के आसपास की है। और जिस महिला से इसकी शुरुआत हुई थी उसका नाम फ्राउ ट्रॉफी था। जिन लोगों ने इस महिला को डांस करते हुए देखा तो उन्होंने यह भी बताया कि उनके आसपास कोई भी संगीत या धुन नहीं बज रहा था। लेकिन फिर भी वह नाचे जा रही थी। और ना ही उन्हें आवाज नहीं सुनाई दे रही थी। वह अपने घर से नाचते-नाचते गली में आई और गली में हर किनारे में जा जाकर के नाचने लगी।

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उसको देखने के लिए लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई किसी ने उसे पागल कहा तो किसी ने सोचा कि उन्हें ऐसा दौरा आ गया है । उन्हें देखकर के लोग हंस रहे थे और किसी की भी हंसी नहीं रुक रही थी। और फ्राउ ट्रॉफी इन सभी बातों से बेखबर केवल नाचते ही जा रही थी।

The Original Dance Craze / The Dancing Plague of 1518 by Jeremie Lederman

कुछ समय बाद उनके पड़ोसी भी एक एक करके अपने-अपने घरों से नाचते हुए बाहर निकलने लगे ।और वैसे भी फ्राउ ट्रॉफी की तरह ही बेसुध होकर कि केवल नाचते जा रहे थे। इन सभी के चेहरे पर कोई भी खुशी है गम के भाव नहीं थे । इन सभी की आंखें बंद थी और केवल वह लोग नाचे जा रहे थे। फ्राउ ट्रॉफी को देख कर के करीब ऐसे ही 34 लोगों ने और नाचना शुरू कर दिया था । सुबह से रात हो गई और इन लोगों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही थी। यह लोग नाचते जा रहे थे। कुछ थक रहे थे कुछ गिर रहे थे। जो इसमें कमजोर दिल की थी वह नाचते-नाचते हाँफने लग रहे थे। उनकी सांस फूलने लग रही थी । और ऐसे ही देखते देखते 15 लोगों की सांसे रुक गई और वह देख जमीन पर गिर गए और उनकी मृत्यु हो गई ।

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एक पूरा दिन लोगों का नाचने में गुजर गया था । लेकिन अगले दिन भी यह सिलसिला जारी था। प्रशासन इस बात से काफी चिंतित था। इन लोगों में से 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी थी ।लेकिन उन लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही थी। लोग नाचते नाचते संख्या में शामिल होते जा रहे थे ।कोई किसी से डांस नहीं करवा रहा था। लेकिन अचानक ही लोग अपने घरों से बाहर आते थे और नाचने शुरू कर देते थे।

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कोई सड़क पर चलते-चलते नाचने लग रहा था तो कोई अपने काम से गया था वहां पर ही नाचने लग रहा था। दो-तीन दिन बाद कुछ शांत हो गई यूरोप प्रशासन ने पूरी घटना को डांसिंग प्लेग का नाम दिया था। इसका जिक्र इतिहासकारों ने अपने किताबों में भी किया है ।उन्होंने इसको डांसिंग डेथ के नाम से संबोधित किया है। किंतु आज तक नहीं समझ पाए कि आखिर लोगों ने नाचना शुरू क्यों किया था। लोगों ने ट्रॉफी को भी ढूंढने की कोशिश की लेकिन उनका कोई आता पता नहीं मिला। या तो वह नाचते-नाचते मर गई या फिर कहीं गुम हो गई। कोई नहीं जानता कि वह कहां गई ।

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कुछ लोगों ने इस घटना को तंत्र साधना का असर बताया था। तो कुछ लोगों ने यह कहा था कि यह मनोवैज्ञानिक कोई स्थिति है इसी कारण ऐसा हुआ। ईश्वर पर विश्वास रखने वाले लोगों ने कहा कि यूरोप में 200 से 500 ईसा पूर्व अंधकार का युग था यानी लोगों के अंदर शैतानी ताकतों का वास था। और 15वी शताब्दी में यूरोप में महिलाओं को डायन समझ करके मार देना भी आम बात थी। इसीलिए लोगों ने उस महिला के ऊपर डायन डाल दिया था लेकिन लोगों के दिलों में यह सवाल अब भी मौजूद था।

डांसिग प्लेग के चलते 16वीं सदी में नाचते-नाचते मर गए थे सैकड़ों लोग !

बता दें कि 16वीं शताब्दी के बाद इस तरह की घटना दोबारा सुनने में नहीं मिली। लोगों ने इसे समय को मंथ ऑफ हिस्टीरिया का नाम भी दिया था। लोगों का दावा यह भी था कि यह केवल यूरोप नहीं बल्कि एशिया एवं अफ्रीका में भी देखने को मिला था।

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लेकिन आपको बता दें कि 1846 में एक बार फिर ऐसी घटना सामने आई जिसे की मेडागास्कर संक्रमण कहा गया। इसमें भी लोग चलते चलते पागलों की तरह के नाचने लगते थे। डॉक्टरों के द्वारा ऐसे लोगों के लिए एंटीबॉडी सी बनाई गई। लेकिन उनका कुछ असर नहीं हुआ। फिर अचानक से ही घटनाएं रुक गई और लोगों का नाचना बंद हो गया। लेकिन 1518 में हुई घटना आज भी एक रहस्य बनी हुई है। धार्मिक एवं साइंटिफिक दोनों तथ्यों के मध्य डांसिंग डेथ की घटना को झुठलाया नही जा सकता है।

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